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परिचय      
 

             विश्व में उत्पादित होने वाले चार प्रकार के व्यवसायिक रेशम की किस्मों में भारतवर्ष ही एकमात्र ऐसा देश है, जहां चारों प्रकार की रेशम (शहतूती, टसर, अरण्डी एवं मूंगा सिल्क) का उत्पादन हो रहा है। मूंगा रेशम का उत्पादन पूरे विश्व में मात्र भारत के असम राज्य में ही किया जाता है। वर्तमान समय में प्रदेश में तीन प्रकार यथाः शहतूती, टसर एवं अरण्डी रेशम का उत्पादन किया जा रहा है। रेशम उद्योग कृषि पर आधारित कुटीर उद्योगों में अग्रणी स्थान रखता है। उत्तर प्रदेश की शस्य-श्यामला उर्वरा भूमि, भौगोलिक स्थिति, जलवायु एवं जैैव विविधता, रेशम उद्योग हेतु सर्वथा अनुकूल एवं उपयुक्त है। रेशम उद्योग के अन्र्तगत शहतूत, अर्जुन एवं अरण्डी की खेती, रेशम कीटपालन एवं धागाकरण आदि क्रियाकलाप मुख्य हैं। शहतूती रेशम कीट का भोज्य पदार्थ शहतूत की पत्ती, टसर रेशम कीटों का अर्जुन एवं आसन की पत्ती तथा एरी रेशम कीट का अरण्डी की पत्ती है। अतः इस उद्योग हेेतु शहतूत, अर्जुन एवं अरण्डी की खेती आवश्यक है। रेशम उद्योग पर्यावरण मित्र उद्योग होने के साथ-साथ श्रमजनित भी है।

             प्रदेश की कच्चें रेशम धागे की मांग वर्तमान मे उत्पादित धागे से बहुत अधिक है, जिसकी पूर्ति देश के कर्नाटक, पश्चिम बंगाल जैसे अन्य राज्यों तथा विभिन्न देशों से आयातित रेशम के माध्यम से होती है। भारत में उत्पादित कच्चें रेशम की पर्याप्त मात्रा मंे खपत प्रदेश के परम्परागत रेशम बुनाई क्षेत्रों वाराणसी एवम् आजमगढ़ में हो रही है। प्रदेश में रेशम की सुदृढ़ बाजार व्यवस्था उपलब्ध है तथा इस हेतु जनपद वाराणसी के सारंग तालाब स्थित स्थान पर सिल्क एक्सचेंज की स्थापना की गयी है। भारतवर्ष के विकसित रेशम उत्पादन राज्यों यथा-कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर आदि से प्रतिस्पर्धा के आधार पर प्रदेश में रेशम उत्पादन को बढ़ावा दिये जाने एवं कृषकों को प्रोत्साहित किये जाने हेतु विभाग द्वारा विशेष सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

         रेशम उद्योग के अन्र्तगत शहतूत, अर्जुन, अरण्डी की खेती को बढ़ावा देते हुए तीनों प्रकार के रेशम उत्पादन से जुडें क्रिया-कलापों हेतु श्रृंखलाबद्ध कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। रेशम उत्पादन से जुड़ें कार्यक्रमों में रेशम कीट के भोज्य वृक्षों के विकास हेतु पोैध उत्पादन, वृक्षारोपण, पत्ती उत्पादन, चाकी कीटपालन, उत्तरावस्था कीटपालन, कोया उत्पादन तथा पोस्ट ककून के अन्तर्गत धागाकरण आदि प्रमुख क्रियाकलाप सम्मिलित हैं।

         शहतूती रेशम का उत्पादन प्रदेश के ज्यादातर तराई, पूर्वांचल एवं पश्चिमी क्षेत्र के जनपदों में किया जा रहा है, टसर रेशम का उत्पादन बुन्देलखण्ड एवं विन्ध्यांचल क्षेत्र तथा अरण्डी रेशम का उत्पादन यमुना नदी के किनारे स्थित कानपुर नगर, कानपुर देहात, फतेहपुर, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन एवं बांदा आदि जनपदों में किया जा रहा है। प्रदेश की ऊष्ण कटिबन्धीय एवं शीतोष्ण जलवायु में शहतूती रेशम के अतिरिक्त ट्रापिकल टसर एवं एरी रेशम उद्योग के क्रियाकलाप सफलतापूर्वक क्रियान्वित किये जाने हेतु सभी आवश्यक सम्भावनायें विद्यमान हैं।

 

 

 

   
 

 

 

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