हमारे बारे में पृष्ठभूमि उद्देश्य
संगठनात्मक ढ़ाँचा शासन स्तर निदेशालय स्तर

 

 

 

कर्मियों के लिये अनुदेश      
 

 
  1. अपने क्षेत्र के आर्थिक विकास का वातावरण तैयार करते हुए अपने विकास हेतु इच्छुक व्यक्तियों/परिवारों के आर्थिक विकास में सहयोग प्रदान करें।

  2. जन समुदाय की आवश्यकता को दृष्टिगत कर तकनीकी एवं आर्थिक दृष्टि से उपयोगी कार्यक्रम की संरचना में लाभार्थी का सहयोग करें।

  3. समय-समय पर कार्यक्रम के संचालन में आ रही तकनीकी एवं प्रशासनिक कठिनाईयों का निराकरण कार्यक्रम से जुडे परिवारों के साथ बैठकर सुनिश्चित करें।

  4. नवविकसित तकनीकियों को लागू करने से पूर्व कार्यक्रम से जुड़े लोगों के मध्य तकनीक की विशेष जागृति उत्पन्न करें तथा उसके पश्चात उसका प्रदर्शन करते हुए नई तकनीकी को लागू करायें। यदि तकनीकी को अपनाने में कोई कठिनाई आ रही हो तो अपने सुझाव के साथ अपने उच्च अधिकारियों को अवगत करायें।

  5. रेशम उद्योग में महिलाओं की सहभागिता 60 प्रतिशत से अधिक है। अत: महिलाओं को सीधे लाभान्वित करने, प्रबन्धन में भागीदारी प्राप्त करने तथा उनके नेतृत्व में विकास करने के लिये कार्यक्रम बनाये। यदि आवश्यक हो तो प्रसार की विधि में भी महिलाओं को समूहों में संगठित कर उनके आर्थिक विकास को सहयोग प्रदान करें।

  6. रेशम उद्योग में प्रसार कार्य की सफलता का मापदण्ड शहतूती पत्ती एवं उच्च गुणवत्ता वाले रेशम कोये का अधिक से अधिक उत्पादन करना है। इसके लिये आप सतत प्रयास करते रहें।

  7. अपने क्षेत्र की जटिल तकनीकी समस्याओं के सम्बन्ध में अपने उच्चाधिकारियों को सही-सही अवगत कराते हुए समय से मार्ग-दर्शन प्राप्त करें।

  8. यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कार्यक्रम से जुड़े परिवारों को कोई आर्थिक हानि न हो। यदि रेशम कीटों अथवा शहतूत पौधों में किसी बीमारी की सूचना प्राप्त हो तो उसकी रोकथाम का उपाय तूरन्त सुनिश्चित करते हुए उसकी सूचना समय से अपने उच्च अधिकारियों को दें।

  9. अन्य देश/राज्य प्रदेश में रेशम उद्योग में विकसित नई तकनीकियों को जानने/सीखने का प्रयास करें तथा इन तकनीकियों का उपयोग अपने क्षेत्र में सुनिश्चित कराने की आवश्यक व्यवस्था करें।

  10. अपने कार्यालय कक्ष के बाहर सूचना पट की व्यवस्था करें।  जिससे यदि कोई लाभार्थी कोई सूचना देना चाहता हो आप के भ्रमण पर रहने पर भी वह अपनी बात सूचना पट पर लिखकर वापस जा सके। अपने भ्रमण से वापस आने पर लाभार्थी की समस्या का निराकरण अविलम्ब कर दें।

  11. प्रत्येक प्रसारकर्मी को अपना रूट चार्ट निर्धारित करना चाहिए जिसकी सूचना कार्यक्रम से जूड़े लाभार्थियों एवं अधीनस्थ कर्मचारियों को होनी चाहिए, जिससे जब भी जिसकों आपकी आवश्यकता हो तो वह आपसे सम्पर्क स्थापित कर सके।

  12. कार्यक्रम से जुड़े लाभार्थियों के साथ इस प्रकार से घुल-मिल जाना चाहिए जिससे कि उसे यह महसूस हो कि आप भी उनके परिवार/समाज के अंग हैं। इस हेतु आपको लाभार्थी के सुख-दुख का साथी होना चाहिए।

  13. माह में कम से कम दो बार किसी निश्चित तिथि को अपने क्षेत्र के कार्यक्रम से जुड़ें/परिवारों के साथ समूह चर्चा करें। इस समूह चर्चा में नई तकनीकियों के सम्बन्ध में इन्हे अवगत कराया जाय तथा यदि कार्यक्रम के संचालन मे सामूहिक स्तर पर कठिनाई आ रही है तो उसकी जानकारी प्राप्त कर उच्चाधिकारियों के सहयोग से निराकरण का उपाय सुनिश्चित किया जाय।

  14. प्रत्येक रेशम कीटपालन फसल के पूर्व निश्चित रूप से कीटपालकों से समूह में चर्चा की जाय जिसमें कीटपालन फसल विशेष हेतु आवश्यक तकनीकियों एवं सावधानियों से लाभार्थी को अवगत करायें।

  15. ऐसी फसलों में जिसमें रेशम कीटों में बीमारी की अधिक सम्भावनायें हैं, आपका दायित्व बढ़ जाता है। इन फसलों को आप अपने अधीनस्थ क्षेत्र में ज्यादा ध्यान दें। यदि कहीं कोई रेशम कीट रोगग्रस्त हो जाय तो उसकी समुचित रोकथाम का उपाय करें। मानसून फसल में यह कार्यवाही विशेष रूप से आवश्यक है।

  16. चाकी कीट का वितरण कीट पालक की क्षमता एवं शहतूत पत्ती की उपलब्धता के आधार पर ही करना चाहिए ताकि कोया उत्पादकता एवं गुणवत्ता में वृद्धि हो सके।

  17. कीट पालन एवं वृक्षारोपण अवधि में प्रसारकर्मी को अपने क्षेत्र में निरन्तर उपस्थित रहना चाहिए ताकि कीट पालकों अथवा वृक्षारोपकों को इन कार्यों में जानकारी प्राप्त करने अथवा किसी समस्या के समाधान में विलम्ब न हो सके।

  18. प्रत्येक रेशम फार्म पर एक रजिस्टर में फार्म से सम्बन्धित महत्वपूर्ण आंकड़े (जैसे कि फार्म का नाम्, रकबा, भूमि किस्म, विकास खण्ड, सम्बद्ध कीट पालक एवं कोया उत्पादन क्षमता) होने चाहिए।

  19. यदि समस्याओं का सामना आप अपने साहस एवं दृढ़ विश्वास से करेंगे तो आप कभी असफल नहीं होंगे।

 

 

 

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