हमारे बारे में पृष्ठभूमि उद्देश्य
संगठनात्मक ढ़ाँचा शासन स्तर निदेशालय स्तर

 

 

 

लाभार्थी का दायित्व      
 

 

 

(क) - नर्सरी स्थापना में

  1. शहतूत पौध उत्पादन हेतु नर्सरी स्थापना के पूर्व भूमि का निरीक्षण एवं मृदा परीक्षण कराना।

  2. रेशम विकास के कार्मिक के पर्यवेक्षण में भूमि की तैयारी करना।

  3. उन्नत किस्म के शहतूत कलम रेशम विकास विभाग से प्राप्त करना।

  4. कलमें तैयार करने, भूमि में रोपण, सिंचाई, निराई, उर्वरक के प्रयोग एवं पौध उखाड़ने इत्यादि की तकनीकी जानकारी रेशम विभाग से प्राप्त करना।

  5. नर्सरी के रख-रखाव एवं पौध के सुरक्षा का पूर्ण दायित्व।

(ख) - शहतूत वृक्षारोपण में

  1. वृक्षारोपण के पूर्व भूमि का निरीक्षण एवं मृदा परीक्षण रेशम विभाग के सहयोग से करा लेना।

  2. वृक्षारोपण के पूर्व भूमि की तैयारी।

  3. वृक्षारोपण हेतु उन्नत किस्म के शहतूत पौध/सैपलिंग्स की व्यवस्था रेशम विभाग से कराना।

  4. पौध रोपण एवं उसके रख-रखाव (जैसे-प्रूनिंग/ट्रिमिंग, गुड़ाई, निराई, खाद/रासायनिक खाद उपयोग, सिंचाई इत्यादि) की तकनीकी जानकारी रेशम विकास विभाग से प्राप्त करना।

  5. अपने शहतूत उद्यान का रख-रखाव एवं सुरक्षा स्वयं करना।

  6. पौधों में यदि किसी प्रकार के रोग सम्भावित हों तो तत्काल अपने निकटतम् रेशम केन्द्र के प्रभारी से सम्पर्क करना।

(ग) - रेशम कीटपालन में

  1. किसी भी रेशम फसल प्रारम्भ होने के पूर्व  अपने शहतूत उद्यान में उत्पन्न होने वाली शहतूत पत्ती का आंकलन रेशम विभाग के कार्मिक से कराकर तद्नुसार चाकी कीट आपूर्ति की डिमाण्ड निकटतम रेशम केन्द्र प्रभारी को देकर समय से कीट प्राप्त करना।

  2. कीटपालन हेतु आवश्यक कीटपालन उपकरण एवं कीटपालन गृह की व्यवस्था स्वयं कर लेना।

  3. रेशम कीटपालन में बरती जाने वाली सम्पन्न तकनीकी ज्ञान का अर्जन रेशम विभाग के कार्मिकों से करना।

  4. कीटपालन प्रारम्भ होने के पूर्व कीटपालन गृह एवं समस्त उपकरणों का विशुद्धीकरण करना।

  5. रेशम कीटों में यदि कोई बीमारी परिलक्षित होती है तो उसकी सूचना तत्काल अपने निकटतम रेशम केन्द्र प्रभारी को देना।

  6. रेशम कोया निर्माण के बाद समय से कोया हार्वेस्टिंग कर उसका ग्रेडिंग स्वयं करना। ग्रेडिंग के बाद कोया को तौलकर अपने रेशम केन्द्र प्रभारी को उपलब्ध कराकर कोया रसीद प्राप्त करना। कोया उपलब्ध कराते समय अनुमानित कोया मूल्य का 80 प्रतिशत अग्रिम धनराशि केन्द्र प्रभारी से प्राप्त करना। पुनश्‍च: कोया मार्केट हो जाने पर कीट मूल्य का भुगतान कर शेष धनराशि का भुगतान केन्द्र प्रभारी से प्राप्त कर उसे रसीद देना।

  7. कोया मूल्य भुगतान में विलम्ब होने पर उसकी जानकारी जनपद के रेशम अधिकारी अथवा निदेशक (रेशम) को देना

 
 

 

 

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