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महिलाओं की सहभागिता      
 

 

         जनसंख्या की दृष्टि से लगभग आधा हिस्सा महिलाओं का है और वे उत्पादन तथा अर्थव्यवस्था की सामाजिक प्रक्रियाओं के लिए अति महत्वपूर्ण हैं। परिवार के साथ-साथ आर्थिक विकास एवं सामाजिक परिवर्तन में महिलाओं का योगदान एवं भूमिका मुख्य है। अन्य योजनाओं की भांति रेशम उद्योग में भी महिलाओं का योगदान बहुत अधिक है परन्तु इस उद्योग के प्रबन्धन एवं निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु अभी तक बहुत कम कार्य किया गया है।

         सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन संस्थान, बंगलौर के अनुसार कीटों के कीटपालन में महिलाओं की सहभागिता 61 प्रतिशत है तथा रेशम उद्योग के विभिन्न क्रिया-कलापों में उनका श्रमांश 53 प्रतिशत है। इससे यह स्पष्ट है कि रेशम उद्योग में महिलाओं की सहभागिता बहुत अधिक है जिसका कारण है-

  1. रेशम उद्योग का कार्य घर पर ही किया जा सकता है इससे उन्हें उन कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता जो उन्हें किसी फैक्ट्री में कार्य करने से होती है।

  2. रेशम धागाकरण का कार्य करने वाली महिलाएं अपने इस कार्य के साथ-साथ अन्य दायित्वों की भी पूर्ति आसानी से कर सकती हैं।

  3. कोया उत्पादन एवं विपणन में महिलाओं की भागीदारी होने से आय पर अच्छा नियंत्रण रहता है।

  4. रेशम उद्योग की आय लगातार सुनिश्चित रहती है।

  5. रेशम उद्योग में संलग्न होने से महिलाओं के व्यक्तित्व में विकास होता है तथा उनके आत्म विश्वास में वृद्धि होती है क्योंकि उन्‍हें इस उद्योग के कार्यों के सम्पादन में अपने घर, समाज एवं यहां तक कि ग्राम के बाहर के भी व्यक्तियों से वार्ता करनी पड़ती है।

उपरोक्त को दृष्टिगत रखते हुए रेशम उद्योग के विभिन्न क्रिया कलापों में महिलाओं की अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाना चाहिए।

ग्राम स्तरों पर महिलाओं का समूह/सहकारी समिति का गठन करते हुए रेशम उद्योग के विभिन्न कार्यों का दायित्व उन्हें दिया जाना चाहिए जैसे:-

  1. ग्राम समाज/सामुदायिक भूमि में शहतूत वृक्षरोपरण कराते हुए रेशम कीटपालन आदि कार्यो का दायित्व महिला समूहों को दिया जा सकता है।

  2. महिला समूहों में आपसी सामंजस्य स्थापित कराते हुए कार्यों का संचालन इस प्रकार किया जा सकता है कि कुछ महिला समूह नर्सरी स्थापित करते हुए शहतूत के पौधे तैयार कर विक्रय करें तथा कुछ महिला समूह अपनी निजी भूमियों में शहतूत रेशम का उत्पादन एवं विपणन कार्य करें। परिणामों ने यह सिद्ध किया है कि रेशम उद्योग अब एक अतिरिक्त आय का साधन नहीं रह गया है वरन यह उद्योग ग्रामीण अंचलों की अर्थव्यवस्‍था को सुदृढ़ करने हेतु एक महत्वपूर्ण उद्योग है। महिला समूहों द्वारा रेशम उद्योग के कार्यों के साथ-साथ अपने ग्राम-क्षेत्र में अन्य विकास कार्यों में भी भागीदारी सुनिश्चित की जा सकती है जिससे अन्तत: उनके ग्राम/क्षेत्र का सामाजिक एवं आर्थिक विकास होगा।

 

 

 

 

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