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रेशम धागाकरण      
 

 

                     रेशम धागाकरण (कोया से धागा निकालने की प्रक्रिया) की प्रचलित पद्धतियों के अन्तर्गत (अ) चरखा रीलिंग (ब) कोटेजबेसिन (स) मल्टीइन्ड मशीनों द्वारा रीलिंग की जाती है।

चरखा रीलिंग

इस पद्धति द्वारा इनफीरियर ग्रेड के रेशम कोयों की रीलिंग की जाती है। प्रति 8 घंटे में 3 कि० ग्रा० सूखे कोयों से 700 से 800 ग्राम तक धागा उत्पादन सम्भावित है। चरखे पर सामान्यत: मल्टी-वोल्टीन प्रजाति के कोया का धागाकरण हो पाता है।

कोटेज बेसिन

इस माध्यम से एक बेसिन के साथ 10 रील संचालित होती हैं, जिसमें एक रीलर 8 घण्टे के अन्तर्गत लगभग 5 कि० ग्रा० सूखा कोया रील करके लगभग 1250 ग्रा० धागा उत्पादन कर सकता है। यह मशीन हस्त एवं पावर चालित होती है जिस पर मल्टी वोल्टीन कोये का धागाकरण किया जाना उचित रहता है।

 

 

मल्टीइन्ड रीलिंग की मशीन

धागाकरण की विकसित पद्धति के अन्तर्गत यह मशीन विद्युत चालित जेट बोट सुविधायुक्त है। इससे बाइबोल्टीन कोयों की रीलिंग गुणवत्तापूर्ण तरीके से सम्भावित है। इस मशीन के एक बेसिन पर 8 घण्टे में 5 कि०ग्रा० कोया से 1500 ग्राम तक रेशम धागा उत्पादन सम्भावित है।

 

                   यदि कृषक/कृषक समूह द्वारा उत्पादित कोया का विक्रय न करके उसका धागाकरण कर रेशम धागे का विक्रय किया जाये तो आय में और वृद्धि (वैल्यू-एडीशन) हो जाती है।

 

 

 

 

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