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संगठनात्मक ढ़ाँचा शासन स्तर निदेशालय स्तर

 

 

 

सूचना का अधिकार - 4(1)बी      
 

बिंदु-(i) अपने संगठन की विशिष्टियां, कृत्य एवं कर्त्तव्य ।

 

() विशिष्टियां

    रेशम निदेशालय के गठन का मुख्य उद्देश्य :-

  • श्रम आधारित उद्योग

  • उद्योग रोज़गार सृजन-13 व्यक्ति/हेक्टेयर/वर्ष

  • 56 प्रतिशत हल्का श्रम जो महिलाओं द्वारा किया जा सकता है।

  • पर्यावरण मित्र

  • प्रदेश के अधिकांश भागों में उपयुक्त जलवायु तथा आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति की उपलब्धता।

  • रेशम कीट की भयंकरतम बीमारी पेब्रीन एवं परजीवी उजिफ्लाई से मुक्त प्रदेश ।

  • प्रति इकाई क्षेत्र में अधिकतम लाभ ।

  • प्रत्येक चरण पर value addition

  • प्रदेश में वृहद बुनाई अधार की उपलब्धता एवं कच्चे रेशम की खपत 5000 मी० टन ।

  • प्रदेश में उच्च गुणवत्ता के रेशम घागे की मांग में बढ़ोतरी।

() कृत्य एवं कर्त्तव्य

  • प्रदेश में रेशम उत्पादन के विभिन्न क्रिया कलापों को निजी क्षेत्र में प्रोत्साहित करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के अधिकतम अवसरों का सृजन।

  • प्रदेश में रेशम घागे की मांग एवं आपूर्ति के अन्‍तर को कम किया जाना।

  • प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में रेशम उत्पादन की सम्‍भावनाओं के अनुरूप योजनाओं/परियोजनाओं की संरचना कर उनका क्रियान्वयन कराया जाना।

  • प्रदेश में रेशम में उद्योग के विकास की सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित कराया जाना।

  • रेशम उत्पादन के क्रिया कलापों का रेशम सहकारी समितियों/स्वयं सहायता समूह/स्वैक्षिक संगठनो के सहयोग से संचालन।

  • भूमिहीन खेतिहर मजदूरों को राजकीय रेशम फार्मों के वृक्षारोपण के माध्यम से रेशम उत्पादन के क्रिया कलापों को प्रोत्साहित किया जाना।

  • विभिन्न ऋण योजनाओं के अन्‍तर्गत स्वयं सहायता समूहों को बैंकों से आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराये जाने हेतु कार्यवाही करना।

  •  कौशल अभिवृद्धि हेतु प्रदेश के बाहर कृषकों/कार्मिकों को प्रशिक्षण पर भेजा जाना तथा प्रदेश में निर्मित रेशम उत्पाद को प्रदर्शन हेतु प्रदेश एवं प्रदेश के बाहर प्रदर्शनियों का आयोजन कराना।

  • रेशम विपणन केन्द्रों को प्रत्येक स्तर पर बढ़ावा दिया जायेगा यथा - कोया उत्पादन, धागा उत्पादन, वस्त्रोत्पादन।

  • वन विभाग के माध्यम से रेशम कीट के खाद्य वृक्षों का वृक्षारोपण कराये जाने हेतु 5 % वृक्षारोपण लक्ष्य निर्धारण ।

  • अन्तर्विभागीय सहयोग के अन्‍तर्गत केंद्रीय रेशम बोर्ड, वन, ग्रामीण विकास, कृषि, बागवानी, DRDA, KVIC, KVIV  एवं बैंकों से समन्वय स्थापित किया जाना।

  • अनुश्रवण व्यवस्था को शासन एवं जिला स्तर पर प्रभावी रूप से सम्पादित कराये जाने हेतु जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी स्तर पर अनुश्रवण समितियों के गठन कर अनुश्रवण का सम्‍पादन।

 विभागीय प्राथमिकतायें

  • उन्नत प्रजाति के रेशम कीट भोज्य सम्पदा का विस्तार।

  • रेशम बीज संगठन का सुदृढ़ीकरण/विस्तार।

  • प्रतिस्पर्धात्मक एवं अधिक कोया कीमत पर कीटपालकों को त्वरित भुगतान ।

  • राजकीय रेशम फार्मों का सुदृढ़ीकरण एवं पुनर्गठन।

  • विभागीय कार्यों की गुणवत्ता में सुधार हेतु विभागीय गतिविधियों का मासिक भौतिक सत्यापन।

  • रेशम बुनकरों के माध्यम से उन्नत प्रजाति का शहतूत वृक्षारोपण, रेशम कोया एवं धागा उत्पादन।

  • रेशम की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार।

  • रेशम विकास कार्यों में महिलाओं की सहभागिता।

  • धागाकरण इकाईयों का विस्तार एवं पोस्ट ककून सेक्टर का विकास ।

  • निजीकरण को बढ़ावा देना तथा ग्रामीणों को आय के अतिरिक्त साधनों को उपलब्ध कराना।

  • बाई प्रोडक्ट्स का बेहतर उपयोग।

  • रेशम विकास कार्यों में सहकारी समितियों की सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु उन्हें उच्चीकृत करना।

  • प्रचार-प्रसार के माध्यम से रेशम उद्योग के प्रति जागरूकता पैदा करना।

 

 
 

 

 

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