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शहतूत पौधालय हेतु दिशा निर्देश      
 

शहतूत पौधालय हेतु दिशा निर्देश शहतूत वृक्षारोपण हेतु दिशा निर्देश
 

 

 

अ-शहतूत बीज द्वारा

ब-शहतूत कटिंग द्वारा

स-लेयरिंग द्वारा

द-ग्राफ़्टिंग द्वारा

             

            उपरोक्त विधियों में से कटिंग द्वारा सरलता तथा न्यूनतम व्यय के आधार पर शहतूत पौध तैयार किये जा सकते हैं। इस विधि से पौध तैयार करने से उसके पैतृक गुणों को संरक्षित किया जा सकता है।

यह एक सर्वमान्य सत्य है कि सफल वृक्षारोपण का आधार स्वस्थ पौध है। छ: माह के समय में कटिंग द्वारा रोपित शहतूत पौध उचित देख-रेख से 3-4 फीट उँची हो जाती है। इस उँचाई की पौध वृक्षारोपण हेतु उपयुक्त होती है। शहतूत पौधालय की उचित देख-रेख एवं रख्‍-रखाव द्वारा रोपित कटिंग के विरूद्ध औसतन 75 प्रतिशत से 80 प्रतिशत पौध प्राप्त होती है। पौधालय की सरलता हेतु निम्न दिशा-र्निदेशों का उल्लेख किया जा रहा है जिसका अनुपालन किया जाना चाहिए।

अ. शहतूत पौधालय हेत भूमि का चयन:--

  1. पौधालय स्थापना हेतु बलुई दोमट अथवा दोमट मिट्टी सिंचाई सुविधा यक्त लगभग 7.00 पी.एच. तक की भूमि का चयन किया जाय।

  2. भूमि समतल होना चाहिए।

  3. भूमि तक पानी आने एवं अधिक मात्रा में होने पर पानी की निकासी का समुचित प्रबन्ध होना चाहिए।

  4. चयनित भूमि बाढ़गस्त क्षेत्रों में न हो। भूमि में वर्षा का पानी एकत्रित नहीं होना चाहिए।

ब. पौधालय हेतु भूमि की तैयारी:-

  1. पौधालय भूखण्ड की जुताई के पहले आवश्यकतानुसार सिंचाई कर गुड़ाई के लिए उपयुक्त बनाना चाहिए।

  2. जुताई/ गुड़ाई के समय लगभग 5-8 टन प्रति एकड़ गोबर की सड़ी खाद/ कम्पोस्ट अच्छी तरह मिला दिया जाना चाहिए।

  3. यदि भूखण्ड में दीमक के प्रकोप की सम्भावना हो तो गोबर की खाद के साथ-साथ लगभग 100 कि०ग्रा० बी0एच0सी0 पाउडर 20 प्रतिशत एल्‍ड्रीन 5 प्रतिशत दीमक की रोकथाम के लिए मिट्टी में मिलाया जाना चाहिए।

  4. भूमि की गहरी जूताई/ गुड़ाई लगभग 30 से 45 सेमी. गहरी, दो बार मिट्टी पलटने वाले हल से अथवा कुदाली से की जानी चाहिए।

  5. गुड़ाई की हुई भूमि से खर-पतवार कंकड़-पत्थर निकालकर समतल कर लिया जाय।

  6. समतल की हुई भूमि को आवश्यकतानुसार सिंचाई की सुविधा के लिये छोटी-छोटी क्यारियों में तैयार किया जाना चाहिए।

स.  शहतूत प्रजाति का चयन:-
शहतूत की उन्नत प्रजातियों जैसे के-2, एस-146 टी.आर. -10, एस-54, प्रजातियों का चयन शहतूत पौधालय की स्थापना हेतु किया जाना चाहिए।

द-शहतूत कटिंग की तैयारी

  1. उन्नत प्रजाति की शहतूत छट्टियों (6 माह से एक वर्ष तक पुरानी) कटिंग हेतु प्राप्त करनी चाहिए।

  2. टहनियों/छट्टियों को साये में पेड़ के नीचे रखना चाहिए जिससे सूखने न पाये।

  3. टहनियों से पेंसिल अथवा तर्जनी की मोटाई का 22 सेमी, की कटिंग तैयार किया जाना चाहिए जिसमें कम से कम तीन चार बड़ हों।

  4. कटिंग के सिरे लगभग 45 डिग्री कोण तेज धार के औजार से काटे जायें, जिससे सिरे पर छाल निकलने न पाये।

  5. यदि कटिंग तुरन्त लगाने की स्थिति में न हो तो कटिंग की गड्डियों को उलटाकर गहरी क्यारी अथवा गडढे में लाइनों में लगाकर उस पर मिट्टी की हल्की परत डालकर फव्वारे द्वारा प्रतिदिन हल्का-हल्का पानी डालें ताकि नमी बने रहे व सूखने न पाये।

  6. आवश्यकतानुसार इस उल्टी कटिंग के बण्‍डलों को निकालकर सीधा खेत में रोपित करें।

य- कटिंग का रोपण एवं रखरखाव:-

  1. भूमि की तैयारी के उपरान्त क्यारियों अथवा रेज्ड वेड को तैयार कर लिया जाये।

  2. क्यारी अथवा रेज्ड वेड में छ:-छ: इंच की दूरी पर लम्बाई में लाईन बना लें। तैयार की गई कटिंग को लगभग 2/3 भाग 3.00 इंच की दूरी पर लाईनों मे गहरा गाड़ देवें।

  3. कटिंग रोपड़ के बाद कटिंग के चारों ओर की मिट्टी को दबा दिया जाये ताकि खाली जगह में हवा जाने से सूखने की सम्भावना न हो।

  4. कटिंग रोपण के बाद गोबर की भुरभुरी खाद की एक पतली पर्त क्यारी में फैलाकर तुरन्त सिंचाई अवश्य की जाय।

  5. प्रथम माह में कटिंग रोपित क्यारी में मिट्टी की ऊपरी पर्त सूखने पर पानी दिया जाय जिससे नमी बनी रहे।

  6. कटिंग रोपण के समय क्यारी में 8-10 लाईनों के रोपण के पश्चात एक फिट स्थान छोड़कर कटिंग रोपण किया जाए जिससे निराई करने में आसानी हो।

  7. एक एकड़ पौधालय पर लगभग 100 कि०ग्रा० यूरिया उचित विकास हेतु उपयुक्त है। इसका प्रयोग 4 से 6 बार लगभग 15-20 दिवस के अन्तराल पर पत्तियों को बचाते हुए किया जाना चाहिए। तत्पाश्चात् तुरन्त सिंचाई की जानी चाहिए।

  8. रासायनिक उर्वरक का प्रथम प्रयोग पौध में 6-8 पत्तियों की अवस्था आने पर किया जाए।

  9. पौधालय का समय-समय पर निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कीटों द्वारा पौधों को कोई हानि तो नहीं पहुंचाई जा रही है। दीमक के प्रकोप में एल्ड्रीन का छिड़काव उपयोगी होगा।

  10. कटिंग से तैयार पौधों को 6 माह के उपरान्त ट्रान्सप्लान्ट करना चाहिए।

  11. तैयार पौधों को नर्सरी से निकालते समय इस बात पर ध्यान दिया जाय कि पौधों की जड़ों को कोई नुकसान न पहुंचे।

  12. उपरोक्तानुसार कटिंग रोपण से प्रति एकड़ लगभग 2.00 से 2.25 लाख कटिंग का रोपण नर्सरी से किया जा सकता है

 

 

 

 

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